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जन्माष्टमी 2020 special : जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं ,श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर क्या करें , जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त कब है ।

भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में सभी रम गए हैं। मंगलवार को सुबह 9:06 बजे से ही अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। वहीं, सोमवार को दो दिन के लॉकडाउन के बाद बाजार खुले तो लड्डू गोपाल, भगवान की पोशाक और झूला आदि लेने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। इसके चलते सदर, सेंट्रल मार्केट, फूल बाग कॉलोनी आदि बाजारों में जाम के हालात बन गए।
12 अगस्त को अष्टमी तिथि सूर्योदयकाल से शुरू होकर दिन में 11:16 मिनट तक ही रहेगी।

11 और 12 अगस्त दोनों ही दिन अष्टमी तिथि के चलते जन्माष्टमी का व्रत और पर्व मनाया जाएगा। हालांकि, मध्यरात्रि के समय अष्टमी तिथि केवल 11 तारीख को ही उपस्थित रहेगी, इसलिए इस दिन जन्माष्टमी व्रत का विशेष महत्व रहेगा।
रोहिणी नक्षत्र का नहीं संयोग
ज्योतिषाचार्य विभोर इंदुसुत कहते हैं कि इस बार जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बनेगा लेकिन 11 तारीख को उदयकालीन तिथि को सप्तमी होगी। सुबह 9:06 मिनट से ही अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। यह तिथि पूरे दिन और रात में व्रत के पारायण के समय भी उपस्थित रहेगी।12 को 11:16 के बाद होगी नवमी।
Janmashtami 2020: इस तारीख को जन्माष्टमी पर बन रहा है विशेष संयोग, यह है पूजा का शुभ चौघड़िया मुहूर्त
चंद्र दर्शन के बाद करें व्रत का पारायण
जन्माष्टमी व्रत का पारायण चंद्रमा के दर्शन के बाद ही किया जाता है। इसके बाद ही व्रत पूर्ण माना जाता है। इस बार 11 अगस्त को चंद्रोदय रात्रि 11:41 मिनट पर होगा। वहीं, 12 अगस्त को चंद्रोदय रात्रि 12:18 बजे होगा।
लड्डू गोपाल को लगाएं माखन मिश्री का भोग
पंडित विनोद त्रिपाठी कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण को मक्खन और मिश्री बेहद प्रिय हैं। ऐसे में इनका भोग विशेष लाभकारी है। ज्योतिषविद भारत ज्ञान भूषण कहते हैं कि विशेष मुहूर्त में पूजन भगवान श्री कृष्ण की विशेष अनुकंपा का योग बनाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन कृतिका नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा, इस दिन चंद्रमा मेष राशि में और सूर्य कर्क राशि में रहेगा। इसके कारण वृद्धि योग भी होगा। 12 अगस्त को पूजा का शुभ समय रात 12:05 मिनट से 12:47 मिनट तक है। पूजा की अवधि 43 मिनट तक रहेगी।

जन्माष्टमी
पर विशेष पूजन व संकीर्तन मुहूर्त
लाभ अमृत मुहूर्त सुबह 10:46 से दोपहर 2:05 तक
शुभ मुहूर्त तीसरे पहर 3:44 से शाम 5:24 तक
लाभ मुहूर्त रात 8:24 से रात 9:44 तक
जन्म, अभिषेक-आरती मध्य रात्रि 12:04 से 12:47 तक

ऐसे करें पूजा
1. चौकी में लाल वस्त्र बिछाएं और भगवान कृष्ण के बालस्वरूप को पात्र में रखें।
2. फिर लड्डू गोपाल को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं।
3. भगवान को नए वस्त्र पहनाएं।
4. अब भगवान को रोली और अक्षत से तिलक करें।
5. अब लड्डू गोपाल को माखन मिश्री का भोग लगाएं। श्रीकृष्ण को तुलसी का पत्ता भी अर्पित करें।
6. भोग के बाद श्रीकृष्ण को गंगाजल भी अर्पित करें।
7. अब हाथ जोड़कर अपने आराध्य देव का ध्यान लगाएं।


यहां आकर्षक झांकियां सजाई जाती हैं। रात में बड़ी संख्या में लोग इन कार्यक्रमों में भाग लेते हैं, लेकिन इस बार ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिलेगा क्योंकि कोरोना संकट की वजह से सभी सार्वजनिक कार्यक्रमों पर रोक लगा दी गई है। लोग सादगी के साथ घरों में ही इस बार यह पर्व मनाएंगे।

जलकल इंप्लाईज यूनियन के अध्यक्ष राम आधार पटेल ने बताया कि कोरोना संकट की वजह से इस बार जन्माष्टमी के सारे कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए हैं। वहीं पुलिस लाइन में झांकी तो सजाई गई है, लेकिन किसी बाहरी व्यक्ति की कार्यक्रम में सहभागिता नहीं रहेगी। इसी तरह अन्य जगहों पर भी सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित नहीं होंगे।

बाजार में लोगों ने की खरीदारी
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व को लेकर सोमवार को बाजारों में लोगों की भीड़ देखने को मिली। लॉकडाउन वाले क्षेत्रों को छोड़ अन्य क्षेत्रों में लोग जन्माष्टमी की तैयारी को लेकर खरीदारी करते नजर आए। कोई झांकियां सजाने के लिए खिलौने खरीदते दिखा तो कई ने व्रत और पूजन से संबंधित सामग्री खरीदी।


गीता वाटिका में कल मनेगी जन्माष्टमी
गीता वाटिका में बुधवार को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। पूर्व में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिर परिसर में भव्य कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं, लेकिन इस बार मंदिर में सादगी पूर्वक यह पर्व मनाया जाएगा। मंदिर से जुड़े उमेश सिंघानिया ने बताया कि इस बार जन्माष्टमी पर किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश मंदिर में वर्जित रहेगा।
व्रत-पूजन कैसे करें
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन प्रात: काल स्नानादि के बाद पूजन-अर्चन कर व्रत का संकल्प करें। भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित कर झांकियां सजाएं। इसके बाद विधि-विधान से पूजन करें। पूजन में देवकी, वसुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा और लक्ष्मी, इन सबका नाम क्रमश: लेना चाहिए। मध्य रात्रि 12 बजे जन्मोत्सव मनाएं। अंत में प्रसाद वितरण कर भजन-कीर्तन करते हुए रात्रि जागरण करें। ऐसी मान्यता है कि जन्माष्टमी का व्रत करने से व्रती को बाल कृष्ण जैसी संतान प्राप्त होती है।


जन्माष्टमी स्पेशल न्यूज़ ।।

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