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मजदूरों की घर वापसी से घबराये 'पैसे वालों' के बुरे हाल, देखें रिपोर्ट

नई दिल्ली। लोकडाउन के चलते विभिन्न प्रदेशों के प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के लिए काफी दिनों से दबाव था
। तीसरी बार लॉकडाउन के एक्सटेंशन से पहले केंद्र सरकार ने राज्यों की मांग पर विशेष रेलगाड़ियों की व्यवस्था भी करवा दी। जब भारी संख्या में प्रवासी मजदूरों ने घर वापस जाना शुरू कर दिया है तो पैसे वालों के पसीने छूटने लगे हैं। पैसे वाले यानी फैक्ट्री, कारखाना, वर्कशाप और बड़े-बड़े बिजनेस हाउस के मालिकों को लग रहा है कि अगर ये मजदूर चले गये तो लॉकडाउन समाप्त होने के बाद काम कौन करेगा। श्रमिक स्पेशल रेलगाड़ी चालू होने के दूसरे दिन ही बड़े-बड़े उद्योगपतीऔर सरकारें मजदूरों से जहां हैं वहीं रुकने की अपील करने लगी हैं।

इस स्थिति को गंभीरता को समझते हुए केंद्रीय एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने भी मजदूरों से अपील की है कि फिलहाल वे जहां हैं, वहीं रहें। स्थिति धीरे धीरे बेहतर होगी और उनकी सुविधा का ध्यान सरकार के साथ उद्योग जगत भी रखेंगे। उधर, कर्नाटक, तेलंगाना, हरियाणा और दिल्ली की सरकारें भी मजदूरों से रुकने की गुहार लगा रही हैं। जैसे ही सरकार को मजदूरों के वापसी की वजह से उद्योग जगत में होने वाले संकट का आभास हुआ, सरकार तुरंत सक्रिय हो गई। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मंझोले उद्योग (एमएसएमई) मंत्री नितिन गडकरी ने मजदूरों से अपील की कि फिलहाल वे जहां हैं, वहीं बने रहें। सरकार और उद्योग जगत मिल कर उनका ध्यान रख रही है। धीरे धीरे स्थिति सामान्य होगी और उन्हें फिर से काम मिलेगा।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि उद्योग शुरू हो गए हैं, जो नहीं खुले हैं वो भी कल से शुरू हो जाएंगे, इसलिए मैं प्रवासी श्रमिकों से अनुरोध करता हूं कि आप अभी अपने घर न जाएं, आपको यहां कोई परेशानी नहीं आएगी। श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने एक वेबिनार के दौरान बताया गया कि इस समय देश भर में करीब 12 करोड़ प्रवासी मजदूर हैं, जो कि अपने घरों से दूर औद्योगिक नगरी एवं महानगरों तथा बड़े शहरों में मजूदरी कर अपना भरन-पोषण करते हैं। इस क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इनमें से आधे से भी ज्यादा मजदूर असंगठित सेक्टर में काम करते हैं। इसका मतलब है कि इनकी नौकरी का कोई ठिकाना नहीं है। इसलिए यही मजदूर कुछ दिक्कत होने पर सबसे पहले गांव का रास्ता पकड़ते हैं।

उद्योग संगठन पीएचडी चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष डी के अग्रवाल का कहना है कि यदि मजदूर वापस चले गए तो उद्योग जगत का काम कैसे चलेगा। उनका कहना है कि इस समय समय सरकार को न सिर्फ यहां रह रहे मजदूरों का पलायन रोकना चाहिए बल्कि गांव जा चुके मजदूरों को भी वापस बुलाने का इंतजाम करना चाहिए।

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